कागजों से परे गरिबी की सच्चाई

गोंदिया में अमृत ग्राम सर्वेक्षण अभियान के दौरान आए हुए अनुभव

कागजों से परे गरिबी की सच्चाई मुख्य फोटो
कागजों से परे गरिबी की सच्चाई अतिरिक्त फोटो

यह अभियान एक सामान्य बस्ती के EWS (आर्थिक दुर्बल) गरीब परिवारों का सर्वेक्षण था, जिसके अंतर्गत बहुत ही संवेदनशील अनुभव प्राप्त हुआ और मन दुःखी हुआ, की क्या वाकई बड़ी जातियाँ TC में नाम लिखवाने से वह परिवार सभी तरह के सुखों से अथवा सर्वसंपन्न हो जाते हैं? नहीं। 

सर्वेक्षण करते वक्त में ऐसे परिवारों से मुलाकात हुई, जिन्हें रहने के लिये घर और दो वक्त की रोटी जुटाने में बेहद कष्ट पड़ते हैं। नाबालिग बच्चे फैक्ट्रियों, दुकानों में काम कर अपने उपजीविका का माध्यम बना रहे हैं। उचित संसाधनों की कमी के कारण शिक्षा के अधिकार से वंचित हैं। 18 वर्ष की आयु के बाद युवावस्था दिशा भटकाव में बहकर अनेक सामान्य वर्ग के युवा बेरोजगारी, संवेदनशील बेरोजगारी के शिकार होते हैं।

आज भी अनेक उम्रदराज युवा विवाह जैसे सुख से वंचित हैं। कारण वे पारंपरिक कार्य कर मौसमी बेरोजगारी के शिकार होकर पिछडते जा रहें है। कुछ युवा खुली बेरोजगारी के शिकार होकर अल्प रोजगार से दुःखी होकर असंवैधानिक कृत्य कर समाज की मुख्य धारा से दूर होते जा रहे हैं। महिलाओं के लिये उचित अवसर होने के बावजूद वह हिम्मत नहीं कर पाती, की आर्थिक समानता के दौर में उन्हें भी सहभागिता मिले और वे भी अपने अस्तित्व के लिये संघर्ष करती दिख रही हैं।

कुछ विद्यार्थियों से मिलने के बाद पता चला कि UPSC, MPSC जैसी स्पर्धा परीक्षाओं की तैयारी करने की मनःस्थिती होती हैं, परंतु घर की जिम्मेदारी और आर्थिक तंगी उनके सपनों का गला घोंट देती है। यह भी अत्यंत दुखद है, की युवा आर्थिक परेशानियों के कारण व्यवसाय के आगे रुकावटें झेलते हैं।

अमृत संस्था EWS युवाओं, महिलाओं के लिये संजीवनी के रूप से कार्य कर रहा है। प्रवास के दौरान कुछ प्रतिभाएँ दिखी । चित्रकला, साहित्य में कुछ करने का जज्बा रखते हैं । किंतु उचित अवसर और उनका सामाजिक परिवेश व्यवस्था कही न कही बाधा बनकर खड़ी है। गरिबी की अवधारणा क्या वाकई में कागज में लिखने से सिद्ध होगी? या इसके भी कुछ मापदंड होने चाहिए, यह प्रश्न मेरे मन में उठा।

यदि सच में ईडब्ल्यूएस कैटेगरी का स्तर बढ़ाना है तो उचित मात्रा में संवैधानिक उपायों के साथ-साथ नैतिक मूल्यों को ध्यान में रखकर कार्य करना आवश्यक है। यह सामान्य जनमानस से लेकर हर व्यक्ति पर लागू होता है। तभी EWS कैटेगरी का स्तर बढ़ेगा।

सवाल ये है, की क्या गरिबी केवल कागज़ों और मापदंडों से निर्धारित की जा सकती है, या वास्तविक स्थिति को समझने के लिए संवेदनशील और व्यावहारिक दृष्टिकोण की आवश्यकता है? EWS वर्ग के उत्थान के लिए संवैधानिक उपायों के साथ-साथ नैतिक और सामाजिक जागरूकता भी आवश्यक है, ताकि नये भारत के निर्माण में समाज के हर वर्ग की सहभागिता सुनिश्चित हो सके।

कार्तिक रविशंकर तिवारी

गोंदिया जिला प्रबंधक, अमृत

अमृत संस्था परिचय


महाराष्ट्र संशोधन, उन्नती व प्रशिक्षण प्रबोधिनी अर्थात अमृत महाराष्ट्र शासन की स्वायत्त संस्था है। जिन खुला प्रवर्ग की जातियों को अन्य शासकीय निगमों अथवा महामंडलों का लाभ नहीं मिलता, ऐसे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग अमृत का लक्ष्य समूह हैं। वार्षिक आय ₹8 लाख से कम होने पर पात्र व्यक्ति अमृत की विभिन्न योजनाओं का लाभ ले सकते हैं।


वेबसाइट :https://mahaamrut.org.in/

Publisher: Kartik Tiwari News publisher name | Date: 07-05-2026 News publication date | Time: 12:20 PM News publication time | Views: 983 Number of times this news has been viewed | District: Gondia Related district of the news
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